चिर यौवन के दाता अश्विनी कुमार







▪️चिर यौवन प्राप्ति के लिए किस देवता की आराधना करना चाहिए ? ▪️चिर यौवन प्राप्ति के लिए अश्विनी कुमारों की साधना की जाती है। देवताओं के चिकित्सक के रूप में विख्यात, अश्वीनी कुमारों की सुन्दरता अद्वीतीय है। अश्विनी कुमारों का एक युग्म है। ये दो हैं। दोनों ही आपस में सगे भाई हैं, एक साथ ही रहते है एवम् किसी का भी उपचार, एक साथ मिलकर ही किया करते हैं। सूर्य एवं संज्ञा के संयोग से जन्मने वाले अश्वीनी कुमार द्वौ ने, अत्यन्त ही वृद्ध एवं क्षीणकाय च्यवन ऋषि को, वृद्धत्व एवम् जर्जर काया से मुक्त करते हुए , अपने समान ही सुन्दर और आकर्षक बना दिया था। ▪️ऋषि दधिचि का मस्तक काट कर, वहां अश्व का मस्तक लगाना हो या विश्यला नामक स्त्री का पैर कट जाने पर, वहां धातु का पैर लगाने की कला हो; या फिर अति वृद्धा एवं घोर रोगिणी, घोषा नामक स्त्री का रोग एवं वृद्धत्व नष्ट कर, रूपवती तरूणी बनाने की क्षमता हो, अश्विनी कुमारों की चिकित्सा क्षमता के चमत्कार अनगिनत हैं एवम् उनका समकक्ष, कहीं अन्यत्र नहीं मिलता। ▪️इन जुड़वां देवताओं का एक अन्य पक्ष यह भी है कि ये वेश बदल कर सभी प्राणियों की चिकित्सा सहायता के लिए सदा सर्वदा सन्नद्ध रहा करते हैं। स्मरण करने पर शीघ्र ही सहायक होने वाले अश्विनी कुमारों की यश गाथा, भारत आज भूल चुका है। ▪️अश्विनी कुमार द्वौ की साधना अब लुप्त हो चुकी है, किन्तु सम्पूर्ण भारतवर्ष में, अब भी, कतिपय ऐसे आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, जिन्हें यह साधना करनी आती है। हिमालय की अगम्य कन्दराओं में अभी भी ऐसे ऋषि हैं, जिन्हें अश्विनी कुमारों का वरदहस्त प्राप्त है। ▪️ऊषा वेला में, घोड़ों अथवा पक्षियों से जुते हुए स्वर्ण के रथ पर आरूढ़ होकर जब अश्विनी कुमारों की सवारी निकलती है तब उस समय रात्रि का अवसान हो चुका होता है एवम् भगवान् भास्कर की सवारी के आने का समय सन्निकट होता है। इसीलिए आयुर्वेद ने ऊषापान का निर्देश दिया है। जो यह रहस्य समझ लेगा, वह सदैव ही रोगमुक्त एवम् प्रसन्नचित्त होकर दीर्घजीवी बना रहेगा। ▪️अश्विनी कुमारों की साधना के कम से कम पांच मन्त्र अभी भी प्रयोग में हैं, किन्तु उन्हें यहां प्रकाशित करना, अनधिकारिक चेष्टा होगी। ऐसे में गुरुआज्ञा ही सर्वोपरि है। अस्तु; ▪️अश्विनी कुमारों की क्षमता, योग्यता एवम् रूप सौन्दर्य भूल चुके भारत को उनकी याद दिलाने के लिए, प्रश्नकर्ता श्री को अनेक धन्यवाद।

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